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नगर विकास मंत्री ने सोशल मीडिया में रिश्वत संबंधी वायरल वीडियो का लिया त्वरित संज्ञान, दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

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Written by
Amit Anand

लखनऊ:- प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए0के0 शर्मा ने सोशल मीडिया में आवास के बदले रिश्वत लेने संबंधी वायरल वीडियो का त्वरित संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वायरल वीडियो में जनपद बदायूँ के सांसद के कर-कमलों से प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत डूडा, बदायूँ के लाभार्थियों को आवासों की चाबी वितरित की जा रही थी। चाबी वितरण समारोह के दौरान ही एक लाभार्थी महिला द्वारा आवास के लिए 30 हजार रुपये रिश्वत दिए जाने की बात कही गई।

ए0के0 शर्मा ने बदायूँ जिले के जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) में प्रतिनियुक्ति के आधार पर परियोजना अधिकारी के पद पर तैनात देवेश कुमार सिंह की प्रतिनियुक्ति को तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए उनकों उनके मूल विभाग उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक लि0, लखनऊ में प्रत्यावर्तित कर दिया गया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही कर निलंबन हेतु संबंधित बैंक के प्रबंध निदेशक को निर्देशित किया गया है। इसके साथ ही जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा), बदायूँ में तैनात म्यूनिसिपल/सिविल इंजीनियर शिवकुमार को भी तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही जनपद बदायूँ में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग के लिए नामित संस्था मै0 सरयू बाबू इंजीनियर फॉर रिसोर्स डेवलेपमेंट पर कठोर कार्रवाई करते हुए डिबार कर दिया गया है।

आरोप है कि देवेश कुमार सिंह के कार्य दायित्वों के दौरान कार्यों में किए गए शिथिल पर्यवेक्षण के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत लाभार्थियों से धन उगाही की गई, जिस कारण से भारत सरकार, प्रदेश सरकार के साथ राज्य नगरीय विकास अभिकरण की भी छवि धूमिल हुई है। नगर विकास मंत्री के निर्देशानुसार अपर निदेशक सूडा आनंद कुमार शुक्ला ने इस संबंध में आदेश निर्गत कर दिया है और जिला अधिकारी बदायूँ से उपजिलाधिकारी,नगर मजिस्ट्रेट,अपर जिलाधिकारी को परियोजना अधिकारी डूडा, बदायूँ के पदीय दायित्वों का निर्वहन के लिए अनुरोध किया है। नगर विकास मंत्री ने विभागीय अधिकारियों व कार्मिकों को सख्त संदेश दिया है कि किसी भी रूप में कार्यों में शिथिलता व भ्रष्टाचार बर्दास्त नहीं किया जाएगा। प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के अनुरूप ही कार्मिकों को कार्य करने के लिए अपनी कार्य संस्कृति में बदलाव भी लाना होगा।

क्या सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिलों पर समय-सीमा तय न करने का निर्णय राज्यों के लिए शासन को और कठिन बनाता है?

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