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गुजरात–महाराष्ट्र पर बादलों का शिकंजा: खेत डूबे, त्योहार फीके, प्रशासन अलर्ट पर

अरब सागर में सक्रिय बादल तंत्र, जिसने गुजरात–महाराष्ट्र के तटीय इलाक़ों में भारी बारिश का अलर्ट बढ़ा दिया है। (स्रोत: Zoom Earth, EUMETSAT/Meteosat-IODC)
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—विश्लेषण डेस्क

सौराष्ट्र–कच्छ से लेकर मुंबई की गलियों तक बादलों ने जीवन जकड़ लिया है। कहीं खेतों में मेहनत से बोई फसलें पानी में डूब गईं, तो कहीं त्योहार की रातें बुझ-सी गईं। अहमदाबाद–वडोदरा में गरबा स्थलों पर सन्नाटा पसरा है, खेलैयों की रंगत धुल गई। मुंबई की लोकल थम गई, ट्रैफ़िक ने शहर को कैद कर लिया। गाँव–कस्बों में कच्चे रास्ते दलदल बने, मछुआरों के जाल किनारे पड़े हैं। यह बरसात केवल आसमान से गिरते पानी की नहीं, उम्मीदों और रफ़्तार पर भारी पड़ती आफ़त की दास्तान है।


अहमदाबाद/मुंबई, 30 सितंबर 2025।
सितंबर की आख़िरी सुबह गुजरात–महाराष्ट्र पर बरसात की काली चादर तान लाई। मौसम विभाग ने सौराष्ट्र और कच्छ के लिए लाल अलर्ट जारी किया, कई जिलों को नारंगी चेतावनी में रखा और मुंबई–ठाणे को भी सतर्कता की कतार में खड़ा कर दिया। अरब सागर से उठे घने बादल मानो ज़मीन से बदला लेने उतरे हों—गाँवों की गलियाँ डूब गईं, खेत–खलिहानों में पसीने से सींची खरीफ़ फसलें पानी में घुलने लगीं।

अहमदाबाद और वडोदरा में गरबा मैदानों पर पानी भर गया; ढोल की थाप पर झूमने वाले खेलैया मायूस होकर लौट गए। इसी वडोदरा में सोमवार दोपहर एमएस यूनिवर्सिटी की फाइन आर्ट्स फैकल्टी में बारिश से गीली लॉबी में करंट लगने से 22 वर्षीय छात्रा काजल चौधरी की मौत हो गई और फैकल्टी ने उसी दिन का गरबा कार्यक्रम रद्द कर दिया—यह हादसा दिखाता है कि बरसात ने जीवन के हर हिस्से को असुरक्षित बना दिया है। उधर, मुंबई की सड़कों पर लोकल ट्रेनें थम-थमकर चलीं और ट्रैफ़िक ने शहर की साँसें जकड़ दीं। यह बरसात सिर्फ़ आसमान से गिरते पानी की कहानी नहीं है; यह किसानों की चिंता, त्योहार की फीकी रातों और शहर की ठहरी धड़कनों की कहानी है—और यही सवाल है कि क्या इस बार भी सारी तैयारी काग़ज़ों तक सिमट जाएगी?

गुजरात: तटीय जिलों में ख़तरे की घड़ी

आईएमडी के मंगलवार सुबह (30 सितंबर) तक के बुलेटिन में गिर सोमनाथ, जूनागढ़ और पोरबंदर लाल अलर्ट में रहे, जबकि अमरेली, राजकोट और देवभूमि द्वारका नारंगी चेतावनी पर रहे। दक्षिण गुजरात में उकाई बाँध का जलस्तर 344 फीट तक पहुँच गया है। गाँव–कस्बों में जलभराव की आहट तेज़ हो चुकी है।

महाराष्ट्र: मुंबई और कोकण में सतर्कता

मुंबई से खुली किताब के रिपोर्टर धवल शाह के अनुसार महाराष्ट्र में मुंबई, ठाणे और पुणे नारंगी अलर्ट पर हैं, जबकि कोकण, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में पीली चेतावनी जारी है। मुंबई ने इस सितंबर को बरसाती सितंबर के रूप में दर्ज कर लिया है।

28 और 29 सितंबर को लगातार हुई बारिश ने शहर का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। लोकल ट्रेनें देरी से चलीं, कई उपनगरीय इलाक़ों में जलभराव हुआ और दफ़्तर आने-जाने वालों को घंटों ट्रैफ़िक जाम झेलना पड़ा। 30 सितंबर को भी रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है, जिसने मुंबई की रफ़्तार को थाम रखा है।

खेत–खलिहानों और गाँव–कस्बों पर बरसात का वार

बीते चार–पाँच दिनों की बारिश से धान या कपास की खड़ी फसलें बड़े पैमाने पर बर्बाद हुईं—ऐसी स्पष्ट पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन जिन खेतों में हर साल पानी भर जाता है या जहाँ तेज़ बारिश से मिट्टी बह जाती है, वहाँ इस बार भी फसलें डूबने और बर्बाद होने का ख़तरा बना हुआ है। आईएमडी की एक प्रेस विज्ञप्ति में भी कहा गया है कि “कृषि — बाढ़ या मृदा कटाव वाले क्षेत्रों में फसल नुकसान की संभावना है।”

सितंबर का समय कपास की खेती के लिए बेहद अहम होता है। इस मौसम में पौधे खेतों में खड़े रहते हैं और उन पर फूल व बॉल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। लगातार बरसात और जलभराव से कपास को सीधा नुकसान पहुँच सकता है—पौधे सड़ने, कीट लगने और पैदावार कम होने का डर बढ़ जाता है।

वहीं दक्षिण गुजरात में बागवानी और तिल जैसी फसलें पहले से ही मार झेल रही हैं। नवसारी और वलसाड जिलों में भारी बारिश और तेज़ हवाओं ने आम और चीकू के बग़ानों को गहरी चोट दी है—कई पेड़ उखड़ गए, फल गिरे और किसानों का महीनों का परिश्रम पानी में बह गया। इंडियन एक्सप्रेस और अन्य स्थानीय रिपोर्टों ने इसे “मुख्य क्षति” बताया है। इसी दौरान नवसारी ज़िले में गरबा पंडालों के ढहने, घरों को नुकसान और बागवानी फसलों के प्रभावित होने की घटनाएँ भी दर्ज हुईं।

तेज़ बारिश का असर केवल बागवानी तक सीमित नहीं रहा। सौराष्ट्र, जूनागढ़ और राजकोट जिलों के बारे में एक कृषि रिपोर्ट (AgroCrops) ने संकेत दिया है कि मूंगफली (ग्राउंडनट) जैसी तिलहन फसलें भी जलभराव से जोखिम में हैं। भले ही यह रिपोर्ट ताज़ा न हो, मगर यह बताने के लिए काफ़ी है कि बारिश का सबसे बड़ा वार अक्सर तेलहन और दलहन फसलों पर ही पड़ता है।

दक्षिण गुजरात के भरूच, झगडिया, धरमपुर और उमरपाड़ा जैसे इलाक़ों में तीन इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिसने न केवल खेतों में कटाव और फसलों को खतरे में डाला बल्कि गरबा स्थलों और बिजली फिटिंग तक को भी क्षति पहुँचा दी। गाँवों में सड़कें दलदल बनीं और किसानों की बेचैनी और बढ़ गई।

बरसात ने तटीय मछुआरों को भी रोक दिया है। समुद्र में ऊँची लहरें और तेज़ हवाओं के चलते प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख़्त चेतावनी दी है। वहीं, बिजली और संचार व्यवस्था पर भी इसका वार हो रहा है—कहीं तार टूट रहे हैं, कहीं ट्रांसफ़ॉर्मर फुँक रहे हैं, जिससे गाँव–कस्बों का अँधेरा और गहराता जा रहा है।

बीते दिनों का असर

28 सितंबर को गिर सोमनाथ के सुतरपाड़ा इलाके में 242 मिमी तक बारिश दर्ज हुई थी, जिसने कई छोटे बाज़ारों और खेतों को डुबो दिया। कई ग्रामीण रास्ते बंद हो गए, फसलें बर्बाद हुईं और किसानों में बेचैनी बढ़ी।

29 सितंबर को भी बरसात का असर जारी रहा। जूनागढ़ जिले के मंगरोल में 102 मिमी वर्षा दर्ज हुई, जबकि गिर सोमनाथ के ऊना और जूनागढ़ के केशोद में 51 मिमी तक बारिश हुई। इन बौछारों ने गरबा स्थलों पर पानी भर दिया, जिससे कई जगह कार्यक्रम स्थगित करने पड़े। वडोदरा में तो प्रशासन को गरबा आयोजन रद्द करने का निर्णय लेना पड़ा।

क्या सुप्रीम कोर्ट की सलाहकारी राय भारतीय संघवाद में राज्यपालों की भूमिका को और अधिक शक्तिशाली बना देती है?

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