
गांधीनगर, 23 फरवरी 2026 | सोमवार सुबह की मधुर शीतलता और बादलों से आच्छादित शांत आकाश के बीच गांधीनगर के सेक्टर 22 में ब्रह्मकुमारीज के परमात्म-प्रतीक ध्वज का पावन झंडारोहण किया गया।
वरिष्ठ राजयोगिनी बीके कैलाश दीदी के पावन हस्तों से सेवाकेंद्र से जुड़ी समर्पित साधिका बीके रचना बहन के निवास पर ध्वज लहराया गया। आयोजन उच्च संकल्प और आत्म-निमित्त भाव से जीवन जीने के संदेश पर केंद्रित रहा। उपस्थित साधकों ने इस क्षण को गहरी आत्मिक अनुभूति के साथ आत्मसात किया।
कार्यक्रम के दौरान कुछ क्षणों की हल्की बूंदा-बांदी हुई। मेघाच्छादित वातावरण में आयोजन शांत और गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में बीके भाई-बहन इस पावन अवसर के साक्षी बने।
झंडारोहण के पश्चात गांधीनगर सेक्टर 28 ब्रह्मकुमारीज सेवाकेंद्र की प्रभारी वरिष्ठ राजयोगिनी बीके कैलाश दीदी ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह ध्वज केवल एक बाहरी चिह्न नहीं, बल्कि ईश्वरीय संरक्षण और मार्गदर्शन की जीवंत अनुभूति है। जिस प्रकार यह ध्वज आकाश में ऊँचा लहराता है, उसी प्रकार साधक के संकल्प भी ऊँचे, पवित्र और स्थिर होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि परमात्मा की छत्र-छाया में किया गया प्रत्येक निस्वार्थ कर्म आत्मा को शक्तिशाली बनाता है। उच्च संकल्प की महिमा का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मन शुद्ध और विश्व-हित की भावना से भरा होता है, तब परमात्मा साधक के जीवन-रथ का सारथी बनकर उसे सही दिशा में अग्रसर करता है। उन्होंने साधकों को प्रेरित किया कि वे अपने विचार, वाणी और कर्म को परमात्म-स्मृति से जोड़ें और जीवन को सेवा, शांति और पवित्रता का उदाहरण बनाएं।

वरिष्ठ राजयोगिनी बीके कैलाश दीदी (दाएं) आध्यात्मिक संदेश देते हुए, साथ में बीके रचना बहन। पृष्ठभूमि में ब्रह्माबाबा-प्रतीक चित्र। नीचे के दृश्य में गांधीनगर सेक्टर 22 स्थित निवास परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उपस्थित बीके भाई-बहन। फोटो: खुली किताब
इस अवसर पर परमात्मा को भोग अर्पित किया गया और उपस्थित भाई-बहनों को प्रेमपूर्वक टोली (प्रसाद) वितरित की गई।
बीके रचना बहन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे वर्ष 1997 से ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ज्ञान से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा का सच्चा ज्ञान और परिचय उन्हें इसी संस्था से मिला। जब उन्होंने ज्ञान को जीवन में उतारा, तो उन्हें प्रत्येक क्षण उसकी निकटता का अनुभव होने लगा। अब हर कर्म में उन्हें यह अनुभूति रहती है कि परमात्मा उनके मार्गदर्शक और संरक्षक हैं।
बीके रचना बहन के भ्राता भास्करभाई ने श्रीकृष्ण से जुड़ा एक प्रेरक प्रसंग सुनाया। प्रसंग का भावार्थ यह रहा कि परमात्मा सदैव साथ रहता है, लेकिन मनुष्य अक्सर अपने निर्णयों और कर्मों में उसे स्थान नहीं देता। जब तक व्यक्ति केवल अपनी बुद्धि, गणना और अहंकार के आधार पर चलता है, तब तक ईश्वरीय मार्गदर्शन विशेषकर संकट के समय स्पष्ट रूप से अनुभव नहीं हो पाता। सच्चे समर्पण, विश्वास और निरंतर स्मृति के साथ ही परमात्मा की शक्ति जीवन में प्रकट होती है।
गांधीनगर के विख्यात ब्रह्मकुमारीज सेवाकेंद्र की ‘गुप्त आत्मा’ माने जाने वाले राजयोगी बीके राजू भाई ने सृष्टि रूपी ड्रामा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह संपूर्ण सृष्टि एक पूर्वनियोजित दिव्य नाटक के समान है, जिसमें प्रत्येक आत्मा अपनी भूमिका निभा रही है। परमात्मा निमित्त आत्माओं के माध्यम से सेवा कराता है। जब व्यक्ति स्वयं को कर्ता न मानकर निमित्त मानता है, तब अहंकार समाप्त होता है और सेवा सहज बनती है।
ब्रह्मकुमारीज संस्था में ध्वजारोहण केवल एक औपचारिक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक संकल्प का प्रतीक है। यह किसी राष्ट्रध्वज की भांति राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि आत्मिक चेतना का सार्वजनिक उद्घोष है। ध्वजारोहण साधकों को स्मरण कराता है कि वे काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकारों पर विजय पाने का संकल्प लें।
महाशिवरात्रि, स्थापना दिवस अथवा किसी विशेष सेवा-कार्य के शुभारंभ पर संस्था द्वारा ध्वजारोहण किया जाता है। ऐसे अवसर साधकों को आंतरिक चेतना से जोड़ते हैं। ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय से जुड़े समर्पित साधक इस ज्ञान को आत्मसात करते हुए अपने निवास या आंगन में भी परमात्म-प्रतीक ध्वज का रोहन करते हैं। लहराता हुआ यह ध्वज उन्हें हर क्षण उच्च संकल्प और आंतरिक स्थिरता की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम का संचालन सेवाकेंद्र की व्यवस्थापिका एवं राजयोग शिक्षिका राजयोगिनी बीके कृपल दीदी ने अपनी मधुर और संयत वाणी में किया। उनके संतुलित एवं आत्मीय संचालन ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा और सौम्यता प्रदान की।









