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निरमा यूनिवर्सिटी में तिरंगे तले आत्मचिंतन का संदेश और अनुशासित एनसीसी परेड

जब तिरंगे के नीचे आत्मचिंतन, अनुशासन और राष्ट्रभाव एक साथ खड़े दिखाई दिए—निरमा यूनिवर्सिटी का गणतंत्र दिवस दृश्य। फोटो: निरमा यूनिवर्सिटी/सूरज गज्जर | कॉम्पोज़िट: खुली किताब
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Bureau Report

अहमदाबाद, 26 जनवरी 2026। गणतंत्र दिवस केवल एक औपचारिक पर्व नहीं, बल्कि वह अवसर है जब एक राष्ट्र स्वयं से प्रश्न करता है—हम कौन हैं, कहाँ खड़े हैं और हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है। ये विचार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं गुजरात सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव जे. पी. गुप्ता ने निरमा यूनिवर्सिटी के प्रांगण में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।

अपने संबोधन में गुप्ता ने स्वतंत्रता के बाद के 77 वर्षों को भारत के लिए एक परिवर्तनकारी यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि इस कालखंड ने देश के सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत ढांचे को गहराई से बदला है। संविधान की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान ने यह तय किया कि हम कैसे शासन करेंगे, कैसे जिएँगे और किस प्रकार प्रगति करेंगे। स्वतंत्रता संग्राम के ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि आज की स्वतंत्रता और अवसर असंख्य त्यागों का परिणाम हैं।


संविधान, शासन और नागरिक जिम्मेदारी पर विचार रखते मुख्य अतिथि जे. पी. गुप्ता—निरमा यूनिवर्सिटी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आत्मचिंतन का क्षण। (फोटो: निरमा यूनिवर्सिटी/सूरज गज्जर)

गुप्ता ने यह भी स्वीकार किया कि विकास के साथ-साथ प्रदूषण, यातायात और सामाजिक असमानताओं जैसी नई चुनौतियाँ सामने आई हैं, जिनका समाधान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से संभव है। उन्होंने युवाओं और शिक्षण संस्थानों से परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करने और समाज के अंतिम व्यक्ति को साथ लेकर चलने की गांधीवादी सोच को आत्मसात करने का आह्वान किया। गणतंत्र दिवस को उन्होंने स्मरण, आत्मचिंतन और संकल्प का दिन बताते हुए 2047 तक भारत को एक समावेशी और सशक्त राष्ट्र बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

77वें गणतंत्र दिवस का समारोह गरिमा, अनुशासन और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि गुप्ता ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। इसके पश्चात राष्ट्रगान की गूंज और गणमान्य नागरिकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की सहभागिता ने पूरे समारोह को राष्ट्रीय चेतना से भर दिया। कार्यक्रम की औपचारिक अध्यक्षता निरमा यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के निदेशक (प्रभारी) प्रो. (डॉ.) नित्येश भट्ट ने की।

एनसीसी परेड बनी विशेष आकर्षण का केंद्र


सधी हुई चाल, एकसमान ताल और अनुशासन का सजीव प्रदर्शन—निरमा यूनिवर्सिटी परिसर में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान एनसीसी कैडेट्स की परेड।(फोटो: खुली किताब)
समारोह के दौरान निरमा यूनिवर्सिटी की एनसीसी परेड विशेष आकर्षण का केंद्र रही। सधी हुई चाल, एकसमान कदमों की ताल और अनुशासित पंक्तियों में आगे बढ़ते कैडेट्स ने सैन्य अनुशासन का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। खाकी वर्दी, काले जूते, सफेद एंकलेट्स और लाल हैकल से सजी हरी बेरेट में सजे एनसीसी कैडेट्स की परेड ने पूरे समारोह को अनुशासन और गरिमा से भर दिया।

एनसीसी की सीनियर अंडर ऑफिसर (SUO) फेनी कटारिया ने परेड कमांडर के रूप में परेड की कमान संभाली। वे अग्रिम पंक्ति में चलते हुए पूरे दल का नेतृत्व कर रही थीं। फेनी के स्पष्ट और सटीक कमांड पर एनसीसी कैडेट्स ने परेड की चाल बदली और मुख्य अतिथि के समक्ष औपचारिक सलामी प्रस्तुत की।


एनसीसी परेड के समापन के बाद मुख्य अतिथि जे. पी. गुप्ता, सीनियर अंडर ऑफिसर (SUO) एवं परेड कमांडर फेनी कटारिया से संवाद करते हुए। फोटो: खुली किताब

फेनी के नेतृत्व में हुई यह परेड अनुशासन, नेतृत्व और सामूहिक जिम्मेदारी का सजीव उदाहरण बनी। परेड के दौरान कैडेट्स की पंक्तियों में एकरूपता और तालमेल स्पष्ट दिखाई दिया। गरिमामय समारोह में मौजूद छात्र-छात्राएँ, शिक्षक और अतिथि इस अनुशासित प्रदर्शन के साक्षी बने और कई दर्शकों ने इस क्षण को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया।

पूरे कार्यक्रम के दौरान निरमा यूनिवर्सिटी परिसर में खुशनुमा और उत्सवपूर्ण माहौल बना रहा। विचारोत्तेजक संबोधन और अनुशासित आयोजन के साथ यह समारोह गणतंत्र दिवस को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक साझा संकल्प और राष्ट्रीय चेतना के जीवंत अनुभव में बदलता दिखाई दिया।

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