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कंटेंट हटाने के सरकारी निर्देश पर दिल्ली हाईकोर्ट में समझौता

ग्राफिक इमेज : खुली किताब
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Bureau Report

नई दिल्ली, 26 सितंबर। आईटी नियम 2021 के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी कंटेंट हटाने के निर्देश को चुनौती देने वाली न्यूज़लॉन्ड्री और वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार की रिट याचिका का दिल्ली हाईकोर्ट ने आज यानी 26 सितंबर 2025 को निपटारा कर दिया। जस्टिस सचिन दत्ता की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता, प्रतिवादी अडानी एंटरप्राइजेज और केंद्र सरकार के बीच आपसी समझौता हो गया है। समझौते के तहत अडानी समूह ने आश्वासन दिया कि वह फिलहाल न्यूज़लॉन्ड्री और रविश कुमार को कोई नया कंटेंट हटाने का नोटिस या कानूनी दबाव नहीं डालेगा, जबकि याचिकाकर्ता पहले से हटाई गई सामग्री को दोबारा प्रकाशित नहीं करेंगे।

अदालत ने पक्षकारों के बीच हुई इस सहमति को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देश की वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं की। सुनवाई के दौरान यह भी दर्ज हुआ कि न तो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और न ही अडानी समूह ने टेक-डाउन निर्देश (ऑनलाइन सामग्री हटाने का निर्देश) को लागू कराने की मांग की, इसलिए फिलहाल याचिकाकर्ताओं पर उस निर्देश का पालन करने का कोई तात्कालिक दबाव नहीं है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा न्यूज़लॉन्ड्री और रविश कुमार के विरुद्ध दायर मानहानि का सिविल मुकदमा दिल्ली की सिविल अदालत में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगा


विवाद की पृष्ठभूमि

16 सितंबर 2025 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आईटी नियम 2021 के रूल 16 के तहत कई डिजिटल प्लेटफॉर्मों—जिनमें न्यूज़लॉन्ड्री और वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार भी शामिल थे—को नोटिस जारी कर अडानी समूह से जुड़ी कुछ रिपोर्टें और वीडियो हटाने का निर्देश दिया। इस निर्देश को न्यूज़लॉन्ड्री और रविश कुमार ने प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताते हुए चुनौती दी और दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। उनका तर्क था कि बिना पूर्व सुनवाई का अवसर दिए जारी यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।


कोर्ट में हुआ समझौता

सुनवाई के दौरान जस्टिस सचिन दत्ता की एकल पीठ के सामने न्यूज़लॉन्ड्री और रविश कुमार, अडानी एंटरप्राइजेज और केंद्र सरकार—तीनों पक्षों ने अपनी बातें रखीं। कार्यवाही के अंत में अदालत ने पक्षकारों के बीच हुए समझौते को रिकॉर्ड पर लिया। इस सहमति के तहत अडानी समूह ने नया टेक-डाउन नोटिस न भेजने और याचिकाकर्ताओं ने पहले से हटाई गई सामग्री को दोबारा प्रकाशित न करने पर सहमति जताई। अदालत ने यह भी जोड़ा कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम है और अडानी समूह का न्यूज़लॉन्ड्रीरविश कुमार के विरुद्ध दायर मानहानि का सिविल मुकदमा जारी रहेगा

आदेश में कोर्ट ने दर्ज किया


याचिकाकर्ताओं को 26 सितंबर दोपहर 12 बजे तक होस्ट की गई किसी भी कंटेंट को हटाने के लिए नहीं कहा जाएगा। यदि याचिकाकर्ताओं ने पहले कोई कंटेंट हटा दी तो उसे पुनः अपलोड नहीं किया जाएगा। यह समझौता केवल तब तक मान्य रहेगा, जब तक कि सिविल सूट में ऑर्डर 39 रूल 1 और 2 के तहत याचिका का निपटान नहीं हो जाता।”



फैसले के निहितार्थ

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि डिजिटल मीडिया पर सरकारी निर्देश और कॉर्पोरेट दबाव कैसे प्रभाव डाल सकते हैं। आईटी नियम 2021 की संवैधानिक वैधता पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के दायरे में है। यह मामला उस बहस को और तेज़ कर सकता है कि सरकार को ऑनलाइन सामग्री हटाने का कितना अधिकार होना चाहिए और पत्रकारिता की स्वतंत्रता को कैसे संतुलित किया जाए।

क्या आपको लगता है कि तकनीकी चेतावनियों को बार-बार नजरअंदाज करना प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है?

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